मैं राज हूँ | आत्मचिंतन और ज़िंदगी पर एक हिंदी कविता – राजश्री
Author: Rajshree | Published: | Category: Poetry & Reflections
मैं न रोता हूँ, न पछताता हूँ
न कुछ खोता हूँ और न ही पाता हूँ।
जो आता है, बसा लेता हूँ
और जाने वाले को दुआ देता हूँ।
सिलसिला ये चलता रहता है,
कोई दबे पाँ...
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